अदृश्य दोस्त या दुश्मन।

सुना था “ज़िंदगी करवट बदलती है” और आज देख भी लिया । ऐसे तो हर इंसान सब कुछ चाह कर , सोच समझ कर करता है फिर उसकी ज़िंदगी में ऐसा क्यों होता है कि ना चाहते हुए भी उसे वह करना पड़ता है जो वह कभी नहीं चाहता । चाहे कोई कुछ भी कर ले कितनी भी ऊंचाईयां हासिल कर ले,  कितना भी इस दुनिया के बारे जान ले लेकिन अगले ही पल में क्या हो जाए यह कोई भी नहीं जानता। यह तो कभी किसी ने नहीं सोचा होगा कि हमारी ज़िन्दगी में कोई एक दिन ऐसा आएगा जब हम सब का घर से निकलना बंद हो जाएगा हम अपने दोस्त, मित्रों से नहीं मिल सकेंगे और वह भी अपने जीवन की सुरक्षा के लिए हमसे नहीं मिल पाएंगे । कुछ दिन पहले पूरी दुनिया अस्त – व्यस्त थी हर कोई अपनी ही दुनिया में खुश था । फिर एक दम से सब कुछ बदल गया ।

एकवायरस”, जो ना दिखने वाली चीज़” है , इस ना दिखने वाली चीज़ ने पूरी दुनिया को हिला के रख दिया अचानक सब कुछ शांत कर दिया। 

पर वास्तव में इसको हम बोले ही क्या शांति बोले या अशांति क्योंकि शांति तो तब होती ना जब हर कोई ख़ुशी से अपने घरों में बैठा होता लेकिन ख़ुश तो कोई भी नहीं फिर यह कैसी शांति । इस वायरस ने  सब के अंदर एक डर सा जगा दिया है कि क्या कभी यह ख़त्म भी होगा या नहीं ,क्या मनुष्य की ज़िंदगी पूरी तरह बदलने वाली है। क्या बदल देगी एक ऐसी चीज़ इस धरती के तौर तरीक़े जो कि दिखाई ही नही देती। 

इस वायरस पर कुछ पंक्तियां :- 

सुना है तू किसी जानवर से निकल कर आया है 

पूरी दुनिया में मनुष्य के लिए अशांति लाया है,

तुमसे लड़ा भी जाए तो कैसे

तू तो एक अदृश्य शत्रु बनकर आया है,

किसने सोचा था एक दिन एक वायरस आएगा 

सब की आज़ादी छीन ले जाएगा,

मनुष्य के लिए यमराज बन के तू आया है 

प्रकृति की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है,

क्या समझें तुम्हें अपना दुश्मन ,या प्रकृति का दोस्त

दोनों ही तरफ तुमने बराबर हाथ बढ़ाया है,

 कहीं किसी को तुमने उनके परिवार से मिलाया है 

तो कहीं किसी को अपने परिवार से दूर करवाया है ।

अगर हम ध्यान से देखें तो इस “वायरस” ने प्रकृति को एक अलग ही उपहार प्रदान किया है कभी यह नहीं सोचा था कि धरती का प्रदूषण कभी कम हो पाएगा बस यह निरंतर बढ़ता ही जा रहा था । इस प्रदूषण की समस्या से प्रकृति की सुंदरता धीरे धीरे छिन रही थी,  लेकिन जब से इस वायरस की वजह से सब बंद करवाया गया है मनुष्य को घर के अंदर रहने को कहा गया है तब से प्रकृति हस्ती खिलती दिखाई दी है बेशक वहाँ मनुष्य की चहल-पहल नहीं है  परंतु इससे जानवर को बहुत फ़ायदा पहुंचा है । आज उसे किसी मनुष्य या शिकारी का डर नहीं है वह निडर होकर जंगलों में घूम रहा है । 

यह सब देख कर समझ नहीं आ रहा कि हम इस वायरस को अपना दोस्त समझे या दुश्मन क्योंकि एक तरफ यह मनुष्य की जान के लिए खतरनाक है इससे हजारों मासूमों की जान जा रही है  तो दूसरी ही तरफ़ यह प्रकृति का दोस्त बन कर आया है, जानवरों के लिए आज़ादी लाया है। 

इस चलती फिरती दुनिया मे इन्सान रिश्तों की महत्ता को भूल गया है  लेकिन आज देखें तो मनुष्य अपने घरों में बंद अपने परिवार के साथ वक़्त बिता रहा है और दूसरी ही तरफ कुछ लोग इस “वायरस” से फैली बीमारी से जूझ रहे हैं और कुछ लोग इसके चलते अपनी जान से हाथ धो बैठे । इस “वायरस” ने दुनिया को थाम के तो रख दिया लेकिन उसे रोक नहीं पाई । इस चलते सनाटे में भी हर कोई कहीं ना कहीं अपने अपने काम में लगा है ।आज मनुष्य ने दिखा दिया है कि :-

ज़िंदगी तुमसे चाहे कितनी भी रूठ जाए 

तुम अपने कर्तव्य से मत रूठो

बस अपने हौसले को बना के रखो 

एक न एक दिन तुम्हें सफलता मिलेगी।

इसने मनुष्य को यह दिखा दिया है कि चाहे हम कितनी भी कामयाबी हासिल कर लें कितना कुछ भी कर लें लेकिन जीवन से बढ़ कर कुछ भी नहीं है अगर जीवन नहीं तो कुछ भी नहीं । अब हमें अपने जीवन को बचाना है चाहे हम इससे ना लड़ सकें लेकिन इससे बचा तो जा सकता है । दुनिया के सभी चिकत्सक अपनी जान को हथेली में रख कर इसके इलाज़ में जुटे हैं  हम भी कहीं ना कहीं अपने घरों में सुरक्षित बैठ कर उनकी मदद कर सकते हैं ।

 यह जो वक़्त मिला है यह बहुत क़ीमती है इसे ऐसे ही ज़ाया नहीं करना है, अपनी ज़िंदगी को बदलने के लिए उसे समझना है।

वक़्त अपना है, सिर्फ़ सोने में नहीं गुज़ारना है, इसे सोने जैसा बनाना है।

बबली।

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