अनेकता में एकता

‘ एकता ‘ जिस शब्द का अर्थ है ‘ एक साथ मिलजुल कर ‘ जब अनेकता मिलकर एकता बनती है तो उस एकता को कोई नही हरा सकता । मैंने बचपन में एक कहानी पड़ी थी कि एक जंगल में चार गाय रहती थी जो कि बहुत अच्छी दोस्त थी पर उसी जंगल में एक शेर भी रहता था । वह शेर हर दिन उन चारों गाय को देखता रहता और वह उनको अपना शिकार बनाना चाहता पर वह डरता था  क्योंकि शेर एक ही था और गाय चार जो कि आपस में मिलजुल कर रहती थी और उन चारों में गहरा रिश्ता था । शेर को पता था कि अगर उसने उन पर हमला किया तो वह मिलकर उसे मार देंगी । शेर हर दिन सोचता रहता कि इनको शिकार कैसे बनाया जाए । फिर एकदिन उन चारों गाय की आपस में लड़ाई हो गई और सब एक दूसरे से अलग हो गई यह देखकर शेर बहुत ख़ुश हुआ और उसने चुप-के से एक गाय को अपना शिकार बना लिया और उसे खा गया । धीरे धीरे उसने सब गाय को अपना शिकार बनाया और उन्हें खा गया । पहले जब उन चारों गाय ने एकता बनाए रखी थी तो तब तक उनको कोई हाथ नहीं लगा सकता था लेकिन जैसे ही उनकी एकता टूटी उन सब ने अपनी जान को गँवा दिया ।

तो ये कहानी जब हमें अपने बचपन में  सुनाई जाती थी तो हमसे पूछा जाता था कि इस कहानी से आपको क्या सीखने को मिलता है तो हम कह देते थे कि ‘ एकता में ही बल है ‘ पर वास्तव में मुझे इसका सही मतलब नहीं पता था ।

हम बहुत से ऐसे काम करते हैं जो सिर्फ अकेले बैठ कर नहीं किए जा सकते उसमें किसी का साथ होना ज़रूरी होता है और एकजुट होकर जब हम किसी भी काम को करते हैं तो उसका महत्व ही अलग होता है जितना अकेले का नहीं होता ।

और बोलते भी हैं ना कि :- 

 

हाथ की पाँच ऊँगली में उतनी ताक़त नहीं होती है।

लेकिन जब वही पाँच उंगलियाँ एक मुट्ठी बन जाती है तब उसकी ताक़त को कोई नहीं हरा सकता ।।

 

जब से मैं आविष्कार में आई हूँ तब से सबसे ज़्यादा मैंने यही देखा है कि सब यहाँ मिलजुल कर काम करते हैं कभी भी मैंने किसी से ये नहीं सुना कि कोई किसी की मदद नहीं करेगा ।

तो असल में एकता है क्या,  इस बात का सही मतलब मुझे आविष्कार में आ-के पता चला वास्तव में  एकता है क्या इस शब्द का सही अर्थ मुझे यहाँ आकर पता चला ।

आविष्कार में सबसे ज़्यादा एकता पर बल दिया जाता है क्योंकि  मैं यहाँ फैलोशिप के लिए आई हूँ। फैलोशिप का मतलब ही यही है कि एकजुट होकर काम करना मिलजुल कर रहना और जब से मैं आविष्कार में आई हूँ तब से मैंने यही सुना है और देखा कि यहाँ लोग एक-दूसरे की मदद लेने में हिचकिचाते नहीं हैं और यहाँ कि सबसे अच्छी बात है कि कभी भी यहाँ पर आप किसी से भी मदद मांगे तो वह कभी भी मना नहीं करेंगे, अगर वह दूसरे किसी काम में भी लगे हो तो भी वह मना नहीं करेंगे बाद में वह ज़रूर मदद करते हैं । अगर कुछ पता न लगे तो हम कितनी भी बार पूछ सकते हैं क्योंकि आगे से मदद के लिए कभी मना नहीं होगा । आविष्कार में उन लोगों को माना जाता है जो कि ज़्यादा से ज़्यादा सवाल करें और यहाँ पर माना जाता है कि जिन लोगों के पास किसी भी बात को लेकर कोई सवाल नहीं होता उसमें दो ही बातें हो सकती है  या तो उन को सब कुछ आता है या कुछ भी नहीं । बस कुछ ना कुछ सीखते रहो और सवाल पूछते रहो चाहे वह कैसी भी बात हो, उसे छोटा या बड़ा नहीं समझना है क्योंकि कुछ भी छोटा या बड़ा नहीं होता बस एकता को अपनाना है और एकजुट होकर काम करना और यहाँ की इसी एकता के कारण आविष्कार के लोगों को आविष्कारकस कहा जाता है । यहाँ की सबसे अच्छी बात ये भी है कि कभी यहाँ किसी पर कुछ भी काम थोंपा नहीं जाता बस हम में उस काम को करने की चाहत होनी चाहिए तो फिर सब मन से आपकी मदद करेंगे ।

कोई भी काम तब तक सही नहीं होगा जब तक हम में उसको करने की चाहत नहीं होगी । बस उस काम में आपकी आवश्यकता दिखनी चाहिए और आप सब ने ये बात तो सुनी ही होगी कि 

आवश्यकता आविष्कार की जननी है ।

कभी कभी हम इतने अकेले पड़ जाते हैं कि किसी से मदद माँगना या किसी से भी बात करना अच्छा नहीं लगता।

इन्सान पर जब मुसीबतों का पहाड़ टूटता है तो ज़िंदगी मानो जैसे नर्क बन जाती है लेकिन उन मुसीबतों को दूर करने का ज़ज़्बा हो और जब मुसीबतों को एकजुट होकर दूर किया जाए तो ज़िंदगी आसान बन जाती है । क्योंकि :- 

 

मुसीबतें जब किस्तों में आती हैं तो जिंदगी ख़र्च हो जाती है। पर किस्तें भरने वाले हज़ार हो तो वही मुसीबत पल भर में ख़त्म हो जाती है ।।

 

कभी कभी मुझे दूसरों से मदद माँगने में झिझक सी लगती है कि अगर मैंने मदद मांग ली तो पता नहीं वह क्या सोचेंगे लेकिन अब ये झिझक आविष्कार में आने के बाद ख़त्म हो रही है क्योंकि यहाँ हर वक़्त हमें यही बोला जाता कि जितनी भी किसी से मदद ले सकते हो लो, और जितना सीख सकते हैं उतना सीखो और कभी भी किसी को अपने से बड़ा या छोटा मत समझो क्योंकि हम सब बराबर हैं और सब एक ही हैं, जैसा व्यवहार आप दूसरों से करेंगें वैसा ही व्यवहार वह आपसे करेंगें और अंत में मैं बस यही कहना चाहूँगी कि :- 

 

एक रहो एक बनो क्योंकि अनेकता में तो आफ़त है 

जब वही अनेकता एकता बनती है तो एकता में ही सबसे बड़ी  ताक़त है।

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