इंजीनियर ऐसे बनाए जाते हैं

अगस्त  के पहले हफ्ते की शुरुआत होती हैं। वर्षा करने वाले मेघ अब इन पर्वतों की नगरी को छोड़, नीचे मैदानी इलाकों की तरफ प्रस्थान करने लगते हैं और एक लम्बी अवकाश के बाद फिर से समय आ गया हैं की विद्यालय अपनी सुबह की घंटी बजा के सभी बच्चों को एक बार फिर विद्या के कलश से निकले अमृत का स्वाद चखने के लिए आमंत्रित करे। हम आविष्कारकों की टोली एक माह के लंबे अंतराल के बाद फिर से विद्यालयों में जाने को तैयार बैठी थी।

बीते एक महीने के समय में हमने खूब तैयारी करी थी। शिक्षण की विषय सूची से लेकर शिक्षण सामग्री तक इस्तेमाल होने वाले एक-एक घटक एवं परिघटकों की अच्छे से जांच करी थी। अपने तरकश को एक बार फिर से नई-नई प्रयोगों और गणित विज्ञान के चमत्कारों के बाणों से भर कर विद्यालय में जाने के लिए खुद को तैयार कर लिया था। हमने विशेषकर उन पर ध्यान अधिक रखा कि कैसे-कैसे और किन-किन तत्वों के द्वारा इन खुराफातियों की खुराफात को एक सही दिशा दी जाए। इनके अक्रमबी-चक्रमबी वाले दिमाग को और किस प्रकार से मैग्नीफाय करा जाए। इसके लिए इस बार हमने एक डिज़ाइन चैलेंज का बाण भी अपने तरकश में डाल दिया था। जो विद्यालय के सबसे पहले दिन पर चलाया गया। जिसने छात्रों और हमारे बीच की खाई को पाटने का कार्य बहुत ही अच्छे से करा।

डिज़ाइन चैलेंज ! वो क्या होता हैं?

एक चुनौती भरा और बहुत ही मजेदार कार्य जिसमें अब तक का जितना भी गणित और विज्ञान का ज्ञान अर्जित किया हैं उसको अभ्यास में लाना। बिल्कुल एक इंजीनियर की भांति। इस चुनौती की शुरुआत होती हैं एक निर्धारित निर्माण की चुनौती को देकर। हमने छात्रों को “बकेट टावर चैलेंज” दिया। जिसमें छात्रों को कुछ चुनिंदा समान द्वारा एक टावर बनाना पड़ता है। टावर बनाने की प्रक्रिया से ज़्यादा इसमें छात्रों को बनाने का रहस्य छुपा हुआ हैं वो इसलिए क्योंकि इसके मुख्यता पांच चरण हैं। हर एक चरण अपने आप में अद्भुत हैं जो छात्र के चरित्र के निर्माण में काम आता हैं। 

पहला चरण: छात्रों को खुद सोचने पर मजबूर करना। इस समय छात्रों को अपनी कल्पना के पार जाने का मौका मिलता हैं वह खुले विचार से निर्माण करने की समझ विकसित करता हैं,

दूसरा चरण: आपस में बातचीत करना। इस चरण के दौरान छात्र अपनी बात अपने समूह को बताता हैं। जिसमें सब अपने विचार रखते हैं। सबके विचारों को सम्मान देना और सुनना छात्र इस चरण में सीख पाते हैं,

तीसरा चरण: यह चित्रकारी का चरण हैं। समूह में जो मॉडल को सुनिश्चित किया गया उसको कागज़ पर प्रदर्शित करना होता हैं।

चौथा चरण: इस चरण में छात्रों को सभी सामग्री देकर, उपरोक्त चरणों के निष्कर्ष का निर्माण करना होता हैं

पाँच चरण: निर्माण का परीक्षण करना। परीक्षण के लिए कुछ भार रखना और उसकी मजबूती को आज़माना।

इन पाँच चरणों के खेल में छात्र निर्माण बखूबी दिखाई देता हैं। जिसको छात्रों को एक निर्धारित समय के अंतराल में बनाना पड़ता हैं। हमने इस चुनौती को बनाने का एक घंटा सुनिश्चित किया। हमको इस एक घंटे की प्रक्रिया में छात्रों को मिलकर बात करने पर प्रोत्साहित करवाना, गहन चिंतन और निर्माण की असीम संभावनाओं पर असर डालना था। जो इस डिज़ाइन चैलेंज का मुख्य उद्देश्य भी था। निर्माण से ज़्यादा उसकी प्रक्रिया पर जोर देना था। जिससे छात्रों में इंजीनियर की भांति सोचने के दृष्टिकोण एवं वैज्ञानिक पद्दति को विकसित किया जा सके। 

हमको इस एक घंटे की प्रक्रिया में चित्रकारी का बेहतरीन नमूने देखने को मिले साथ ही सीखने को भी बहुत कुछ मिला। हमने जाना कि कैसे कक्षा में भविष्य के उजागर इंजीनियरस को तैयार किया जा सकता हैं। कैसे किसी विषय को बनाने से पहले उसको मस्तिष्क की कल्पनाओं में खड़ा करना होता हैं। कैसे समूह में छात्रों को काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता हैं। जो उनको जीवन में साथ कदम से कदम बढ़ाकर चलने की प्रेरणा भी देता हैं।

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